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लखनऊ : विवाहिता की हत्या मामले में पति और सास-ससुर को दस साल का कारावास

लखनऊ : विवाहिता की हत्या मामले में पति और सास-ससुर को दस साल का कारावास

लखनऊः मारपीट की घटना से नाराज होकर पड़ोसी युवती को जलाकर हत्या करने की आरोपी हमीदा बानो उर्फ पप्पो को दोषी ठहराते हुए एडीजे मयंक त्रिपाठी ने आजीवन कारावास और 25 हजार के जुर्माने से दंडित किया है. कोर्ट ने जुर्माने की समस्त धनराशि को मृतका के माता-पिता को देने का आदेश दिया है.
कोर्ट में सरकारी वकील अनिल मिश्र और मुन्ना लाल ने तर्क दिया कि वादी लल्लू यादव ने 2 अक्टूबर 2016 को सहादतगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थीय कहा गया था कि वादी और उसकी पत्नी घर पर नहीं थे. इसी दौरान दाल छौंकने के विवाद के चलते मकान के एक हिस्से में रहने वाली हमीदा और उसकी नाबालिग बेटी से वादी की बेटी गुंजा का विवाद हुआ था. बताया गया दोपहर को वादी बेटी गुंजा बाथरूम गई थी. वहीं पर हमीदा की नाबालिग बेटी ने गुंजा को पकड़ लिया और हमीदा ने मिट्टी का तेल डालकर जला दिया. गुंजा का चिल्लाना सुनकर वादी के अन्य बच्चे वीरेंद्र व अंजू आ गए और वादी को सूचना दी. जिस पर वादी ने अपनी पुत्री को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया जहां इलाज के दौरान 4 अक्टूबर 2016 को मौत हो गई थी.


दहेज की मांग पूरी न होने पर विवाहिता की गला घोंटकर हत्या करने के मामले में आरोपी पति रविन्द्र सिंह उर्फ रिंकू, सास तरुणा उर्फ गुड्डी और ससुर रणबीर सिंह को दोषी ठहराते हुए सत्र न्यायाधीश राम मनोहर नारायण मिश्र ने दस वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है. कोर्ट ने प्रत्येक अभियुक्त पर सात-सात हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है. अदालत के समक्ष जिला शासकीय अधिवक्ता मनोज त्रिपाठी ने तर्क दिया कि झांसी के रहने वाले थान सिंह ने 20 जुलाई 2013 को गोसाईगंज में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि मार्च 2011को उसकी पुत्री उषा का विवाह रविन्द्र सिंह के साथ हुआ था. विवाह के बाद से ही पति रविन्द्र, सास तरुणा, ससुर रणबीर सिंह और देवर दीपक सिंह कम दहेज के ताने देते हुए उषा को प्रताड़ित किया करते थे व मारपीट भी करते थे. बहस के दौरान कहा गया कि आरोपी उषा से जमीन बेचकर तीन लाख रुपये लाने का दबाव बनाया था. इसी बीच 18 जुलाई 2013 को उषा ने वादी को फोन करके बताया कि आरोपी उसकी हत्या की साजिश रच रहे हैं. बाद में 19 जुलाई को वादी को सूचना मिली कि उसकी पुत्री को आरोपियों ने जान से मार दिया है. अदालत ने जहां एक ओर पति, सास व ससुर को कारावास एवं जुर्माने से दंडित किया है. वहीं देवर दीपक सिंह को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है.



वहीं, एक अन्य मामले में घर पर ट्यूशन पढ़ने आई नाबालिग के साथ दुराचार का प्रयास करने के आरोपी शिक्षक कन्हैया उर्फ कृष्ण चन्द्र तिवारी को दोषी ठहराकर पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश गुणेंद्र प्रकाश ने दस वर्ष के कारावास और 20 हजार के जुर्माने से दंडित किया है.


कोर्ट में सरकारी वकील शैलेश कुमार सिंह और अरुण कुमार ने तर्क दिया कि वादी ने गुडंबा में 9 दिसम्बर 2015 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वादी की 11 वर्षीय बेटी बसेरा मोड़ पर 4 माह से आरोपी से ट्यूशन पढ़ने जाती थी. 17 नवम्बर को आरोपी ने अन्य बच्चों की छुट्टी कर दी और वादी की बेटी को पढ़ाने के बहाने कमरे में ले जाकर मुंह दबाया और दुराचार का प्रयास करने लगा. कहा गया कि बच्ची किसी तरह छूट कर घर आई और सारी बात अपनी मां को बताया. लेकिन वादी की पत्नी ने लोकलाज के भय से वादी को उस दिन नहीं बताया. वादी को घटना की जानकारी 8 दिसम्बर को हुई, जिसके बाद रिपोर्ट दर्ज कराई गई.