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वाराणसी विकास प्राधिकरण के खेल में फंस गया बैंक, बंजर जमीन पर दिया तीन करोड़ 84 लाख रुपये लोन, नर्सिंग होम बनी नहीं डॉ चुका रहा किस्त,,,।

वाराणसी विकास प्राधिकरण के खेल में फंस गया बैंक, बंजर जमीन पर दिया तीन करोड़ 84 लाख रुपये लोन, नर्सिंग होम बनी नहीं डॉ चुका रहा किस्त,,,।


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एजेंसी डेस्क : (वाराणसी ब्यूरो),।वाराणसी विकास प्राधिकरण के खेल में डॉक्टर ही नहीं, बल्कि बैंक आफ इंडिया भी फंस गया। 

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बैंक आफ इंडिया (अर्दलीबाजार) ने वीडीए पर भरोसा करते हुए मई-2020 में 3.84 करोड रुपये लोन बंजर जमीन पर कर दिया।बैंक के अधिवक्ता ने क्या जांच की, कहां चुक हुई, यह कैसे हुआ, यह पहेली बनकर रह गई है। बैंक से लोन लेने के बाद डॉक्टर हर माह ढाई लाख रुपये किश्त जमा कर रहे हैं लेकिन जमीन पर कब्जा कब मिलेगा उन्हें मालूम नहीं है। वह अपनी पीढ़ा को किसी से बता नहीं पा रहे हैं। इसको लेकर पूरा परिवार सदमे में है, इतनी बढ़ी रकम कैसे जमा होगा।

क्या है पूरा मामला यह जाने,,,,,,,

चिकित्सक डॉ. विवेक राज सिंह ने वाराणसी विकास प्राधिकरण की लालपुर प्रथमचरणआवासीय योजना के तहत नर्सिंग होम भूखंड संख्या ए-125-डी का कुल क्षेत्रफल 876.13 वर्ग मीटर जमीन नीलामी में ली। वीडीए ने 10 जून-2020 को पत्र जारी कर डा. विवेक राज सिंह को आवंटित प्लाट का पैसा जमा करने के लिए पत्र लिखा। 

चिकित्सक ने किसी तरह बैंक से लोन लेन लेकर चार करोड़ 12 लाख 97 हजार 711 रुपये वीडीए में जमा किया। प्लाट पर कब्जा और रजिस्ट्री नहीं होने पर चिकित्सक हाईकोर्ट गए और कोर्ट के आदेश पर प्लाट की रजिस्ट्री सहायक संपत्ति अधिकारी ने की।

स्वास्थ्य विभाग से दी एनओसी,,,

डा. विवेक राज सिंह ने वीडीए में नक्शा पास कराने के लिए आवेदन किया तो उन्हें स्वास्थ्य विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लाने को कहा गया। नर्सिंग होम भूखंड पर तीन अगस्त वर्ष 2022 को स्वास्थ्य विभाग ने एनओसी इस शर्त पर दिया कि आप विभाग के नियमों का पालन करेंगे। मुख्य चिकित्सा धिकारी ने अपने आदेश में लिखा कि उप मुख्य चिकित्साधिकारी डा. पीयूष राय की रिपोर्ट पर एनओसी दी जाती है। शर्तों का उल्लंघन करने पर एनओसी निरस्त कर दी जाएगी।

बैंक के अधिवक्ता पर उठे सवाल,

सामान्य व्यक्ति बैंक से लोन लेने जाता है तो उसे अधिकारी कागजी कोरम के बारे में बताते हुए जमीन का रजिस्ट्री का पेपर मांगते हैं। यदि किसान की जमीन है तो खतौनी मांगते हैं। यह साफ शब्दों में कहा जाता है कि जमीन का मुआयना बैंक के अधिवक्ता करेंगे, इसके एवज में उन्हें पांच से 10 हजार रुपये देने होंगे। बैंक अधिकारी यह भी कहते हैं कि हम इसमें कुछ नहीं कर सकते हैं, यह बैंक की ओर रखे गए अधिवक्ता हैं।

किश्त जमा नहीं करने पर बैंक करेगा वसूली की कार्रवाई,,,,,,,

डॉ. विवेक राज सिंह का मीडिया से कहना है कि बैंक आफ इंडिया से 3.84 करोड रुपये लोन लिया हूं। पैसा वीडीए के खाते में चला गया है, यदि हम बैंक का किश्त जमा नहीं करते हैं तो हमारा सिविल खराब होगा। बैंक मेरे के खिलाफ वसूली की कार्रवाई शुरू कर देगी। यदि प्लाट पर कब्जा मिला होता तो शायद अब तक नर्सिंग होम बनकर तैयार हो गया होता और उससे कुछ आय शुरू हो गई होती। किश्त भरने में आसानी होती। अब आप लोगों के माध्यम से शायद मुझे न्याय मिले।